अध्याय 2
**भविष्य मालिका पुराण** का दूसरा अध्याय मानवता के विकास, सामाजिक और धार्मिक पतन, और आध्यात्मिक पुनरुत्थान की चर्चा करता है। महर्षि अच्युतानंद द्वारा रचित इस ग्रंथ का उद्देश्य मानवता को आगामी युगों की चुनौतियों के लिए तैयार करना और उन्हें धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना है। ### अध्याय 2: मानवता का पतन और पुनरुत्थान **अध्याय 2 का प्रारंभिक वर्णन:** दूसरे अध्याय की शुरुआत में महर्षि अच्युतानंद अपने शिष्यों को बताते हैं कि कलियुग में मानवता का पतन कैसे होगा और किस प्रकार लोग धर्म, नैतिकता और सत्य के मार्ग से भटक जाएंगे। वे बताते हैं कि जैसे-जैसे कलियुग आगे बढ़ेगा, मनुष्य का आचरण, उसका व्यवहार और उसकी जीवन शैली धीरे-धीरे बदलती जाएगी। महर्षि कहते हैं, “कलियुग में लोग अपने निजी स्वार्थों को सर्वोपरि मानेंगे और धर्म और सत्य के मार्ग से विमुख हो जाएंगे। सामाजिक संरचना कमजोर हो जाएगी और परिवारिक संबंध टूटने लगेंगे। भाईचारा और प्रेम की जगह नफरत और ईर्ष्या का बोलबाला होगा। लोग अपने निजी हितों के लिए दूसरों का अहित करने से भी नहीं हिचकिचाएंगे।” **धार्मिक और सामाजिक पतन:...